राम नाम के मोती से
सुन्दर-सा हार बनाएँ ।
मन सुन्दर हो,हो तन सुंदर
गुणगान प्रभु का गाएँ।
विचलित जब भी हो जाए मन
प्रभु का ध्यान करो।
दो दिन की माया को समझो
और उड़ान भरो।
नहीं सदा के लिए ठिकाना
इस जग में है भाई।
कर लो धन-दौलत की चाहे
जीवन में खूब कमाई।
काम नहीं आएगी ये जब
हो जाए जग से विदाई।
रह जाएगी धरी यहीं
ये दौलत जितनी पाई।
इसीलिए प्रभु तारें नय्या
ऐसी जुगत लगाओ।
आना पड़े न फिर से भटकने।
लोभ को दूर भगाओ।
नहीं किसी का कोई यहाँ
क्यों घट में प्राण हैं अटके।
करो विनय कि वश में हो मन
इस जग में कोई न भटके।
नहीं किसी के संग आना है
नहीं किसी संग जाना।
आने-जाने का नियम जगत का
है उसे सभी ने निभाना।
कर्म-फल मिल जाए अभी
प्रभु ऐसा रचो विधान।
जन्म-मरण के चक्र से
देना मुक्ति कृपा निधान।