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सोमवार, 24 सितंबर 2018

सच्ची जीत

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत,

हिम्मत से बाँधा टले, यही जीत की रीत।


                 सच मेंं ,जीवन के किसी भी मोड़ पर जब किसी भी तरह की हार का आभास हो तो हमारी हिम्मत ही हमारे मन में जीतने की आशा को जगाए रखती है।जीतना किसे अच्छा नहींं लगता।जीतने की प्रबल इच्छा हर किसी के मन में होती है। यूँ तो कठिन परिश्रम से ही सफलता या जीत मिलती है। लेकिन कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि हमने तो मेहनत की थी या हमने तो पूरी कोशिश की थी लेकिन फिर भी हमें असफलता या हार का सामना करना पड़ा। ऐसा सोचकर कि हमारी कोशिश में कहीं थोड़ी कमी थी और मन में और मेहनत करने की ठानकर हम अपना प्रयास करते रहें तो किसी न किसी रूप में हमारी जीत निश्चित है।
                 कभी-कभी हमारी असफलता या हमारी हार में भी हमारी जीत होती है। हमारी वो जीत प्रत्यक्ष रूप से हमें नहीं दिखाई देती परंतु उसका परिणाम बड़ा सुखद होता है। जैसे जब किसी बात पर किसी दूसरे व्यक्ति से कभी हमारी बहस हो जाय और उसका कोई अंत न निकल रहा हो तो अचानक हम चुप हो जाएँ। उस समय ज़रूर ऐसा लगेगा कि हमने हार मान ली लेकिन इसका परिणाम ये होगा कि एक तो बेकार की बातों से हम बच जाएँगे दूसरा कभी-कभी बहस झगड़े का रूप भी ले लेती है, तो हम बेकार के ऐसे झगड़ों से बचेंगे। हमें मानसिक तनाव नही होगा। ठीक  समय पर ये बात भी सामने आ जाएगी कि बहस का विषय उचित था या नहीं या हम यूँ ही अपना कीमती समय बरबाद कर रहे थे। यदि बहस का विषय सही था तो ये बात भी बहस खत्म होते ही हमारे सामने आ जाएगी कि हममें से कौन सही था और कौन गलत।
                   हमारे मन में सदा जीतने की चाह होनी चाहिये लेकिन सही मार्ग का चुनाव करना भी जरूरी है। मन में जीत के प्रति उत्साह, उमंग और हिम्मत सदा बनाए रखिए, जीत का भाव मन में सदा जगाए रखिए। तभी मिलेगी जीवन में सच्ची और अच्छी जीत।

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