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शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

जीवन और प्रकृति

                            इस संसार में हर प्राणी के जीवन की एक निश्चित समय सीमा है। कोई भी अजर-अमर नहीं है। यूँ तो हर प्राणी को जीवन मिला है लेकिन मनुष्य को ही विधाता की सर्वोत्कृष्ट रचना माना जाता है। केवल एक मानव ही है जिसके पास एक सभ्य और संस्कारित जीवन जीने की कला, योग्यता और सुअवसर हैंं। जिसके पास बुद्धि, विवेक और भाषा-बोलियाँ हैं जो उसकी भावनाओं, विचारों या उद्गारों की
अभिव्यक्ति की शक्ति हैं और साधन भी।
                    मानव जीवन की अनेक विशेषताएँ हैं जो उसे अन्य प्राणियों से अलग और विशेष बनाती हैं। मानव जीवन अमूल्य है। इसे अमूल्य बनाना भी जरूरी है । मानव के आचार-विचार और उसका कृत्य इस जगत को बहुत प्रभावित करता है। मानव ही है जो सारी धरा और पर्यावरण के प्रति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्वयं मानव के लिए और साथ ही धरती के लिऐ भी मानव का रहन-सहन, खान-पान उसकी मूलभूत महत्पूर्ण आवयकताएँ  और उसकी सोच का बहुत महत्व है ।
                    ये धरती केवल एक मानव मात्र की ही नहींं है बल्कि सबकी है। अत: प्रत्येक मानव का भविष्य में मानव जीवन के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि वह क्या सोचे या करे और क्या न करे। मानव का हर एक छोटे से छोटा सोच-समझकर लिया गया निर्णय मानव जीवन को सुरक्षित और खुशहाल बना सकता है। बस जरूरत है ध्यान देने, स्वयं जागरूक होने और दूसरों को जागरूक करने की ताकि किसी से भी ऐसी कोई गलती न हो जो जीवन के लिए घातक हो।
                    इस सुंदर प्रकृति का जो रूप, जो सौंदर्य हमारे पूर्वजों ने देखा उससे बहुत ही बदला और बिगड़ा रूप आज हमारे सामने है। अपनी जिन गलतियों को हम अपनी प्रगति मानकर आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल हो रहे हैं, हमारी वही गलतियाँ आने वाले समय में हमारे लिए बहुत सारी परेशानियों का कारण बन सकती हैं। भावी पीढ़ी के लिए एक सुंदर प्रकृति का उपहार केवल एक सपना बनकर न रह जाए इसके लिए हमें समय रहते जागरूक होना ही होगा। प्रकृति का कण-कण जीवनदायी है। प्रकृति के सुंदर रूप में ही प्राणीमात्र का जीवन सहज, सुगम और सुरक्षित है। प्रकृति की सुरक्षा में ही हमारे जीवन की रक्षा निहित है। प्रकृति को इसके आभूषण कहे जाने वाले वनों से सजाएँ और अपना जीवन बचाने के लिए ऐसे सार्थक प्रयास करें कि प्रकृति को भी हानि न पहुँचे और जीवन पर मँडराता हर संकट भी टले।

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