क्यों! क्यों! क्यों!
कभी- कभी
बहुत सारे
क्यों आकर
घेर लेते हैं हमें
हर क्यों का
उत्तर मिल पाना
आसान नहीं होता
हर जगह
हर कोई
फसल नहीं बोता
फिर क्यों ?
उग आते हैंं
इतने सारे क्यों
कभी सुखद
अभी दुःखद
अंत वाले
ये बहुत सारे क्यों
सबके जीवन में
अपना स्थान
बना लेते हैं
कभी सुख- चैन
छीनते हैं
कभी संतुष्टि
जगा देते हैं
ये क्यों
बड़े ही हठीले हैं
महत्वहीन तो नहीं
लगते कुछ
सजीले है!
किसी गूढ़ रहस्य को
खोजने में
हैं ये बड़े समर्थ
कुछ क्यों
ऐसे होते हैंं
जिनका उत्तर ढूँँढ़ना
नहीं होता है व्यर्थ
तो चुनें ऐसे क्यों
जो हों उपयोगी
और जिनका
उत्तर भी बने
सबका सहयोगी।
कभी- कभी
बहुत सारे
क्यों आकर
घेर लेते हैं हमें
हर क्यों का
उत्तर मिल पाना
आसान नहीं होता
हर जगह
हर कोई
फसल नहीं बोता
फिर क्यों ?
उग आते हैंं
इतने सारे क्यों
कभी सुखद
अभी दुःखद
अंत वाले
ये बहुत सारे क्यों
सबके जीवन में
अपना स्थान
बना लेते हैं
कभी सुख- चैन
छीनते हैं
कभी संतुष्टि
जगा देते हैं
ये क्यों
बड़े ही हठीले हैं
महत्वहीन तो नहीं
लगते कुछ
सजीले है!
किसी गूढ़ रहस्य को
खोजने में
हैं ये बड़े समर्थ
कुछ क्यों
ऐसे होते हैंं
जिनका उत्तर ढूँँढ़ना
नहीं होता है व्यर्थ
तो चुनें ऐसे क्यों
जो हों उपयोगी
और जिनका
उत्तर भी बने
सबका सहयोगी।
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